हाथरस सीट पर जिले से बाहर के प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चाओं के बाद शुरू हुआ विरोध

हाथरस। भाजपा द्वारा हाथरस विधानसभा सीट पर जनपद से बाहर के दावेदार को प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चाओं के बीच भाजपा कार्यकर्ताओं ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर अपना आक्रोश जताना शुरू कर दिया है। वहीं कुछ सोसालमीडिया यूजर ने इस प्रकार के मुद्दे को दरकिनार कर योगी को वोट करने की बात कही है। फ़ेसबुक पर कई लोगों द्वारा डाली गई इन पोस्टों पर जमकर कमेट्स आ रहे है ।
अचानक हाथरस विधानसभा सीट पर भाजपा से बाहरी प्रत्याशी के चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाओं के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर विरोध किया है। फेसबुक यूजर ब्रजेश शुक्ला ने पोस्ट डाल कर लिखा है कि “एक ही बाहरी से हाथरस परेशान है दूसरे की आवश्यकता नही #भाजपा हाथरस ,योगी से वैर नही,बाहरी की खैर नही।”
फेसबुक यूजर राजपाल सिंह दिसवार ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि कटु बात यह है कि प्रत्याशी हाथरस का होगा तो ही हाथरस जीतेगो बाकी राम जाने। उनकी पोस्ट कही भी भाजपा प्रत्याशी को लेकर नही लगती है लेकिन पोस्ट के कमेट्स भाजपा प्रत्याशी को लेकर ही हुये है। इस पोस्ट पर फेसबुक यूजर आर शिवम पंडित ने कमेंट्स में लिखा है कि हाथरस से हरिशंकर माहौर का टिकट कटा है पूर्व सांसद राजेश दिवाकर जी की घरवाली को मिलेगी 100प्रतिशत देख लेना।
फेसबुक यूजर नितिन कौशिक ने इसी पोस्ट पर कमेट्स करते हुए लिखा है कि बीजेपी का कार्यकर्ता क्या टेंट कुर्सी लगाने को है उसमें चुनाव लड़ने की योग्यता नही क्या।
फेसबुक यूजर अंसुल शर्मा ने अपनी पोस्ट में “प्रत्याशी बाहर से ले रहे हो तो वोटर भी बाहर से ही ले आओगे क्या प्रत्याशी बाहर का वोटर हाथरस का बहुत नाइंसाफी है..” लिख कर नाराजगी जताई है। इसी प्रकार फेसबुक पर आधा दर्जन के लगभग पोस्ट डाल कर बाहरी प्रत्याशी का विरोध किया गया है।

सुनियोजित तरीके से डाली जा रही पोस्टों के पीछे कौन?

फेसबुक पर डाली जा रही पोस्ट सुनियोजित है। एक ही भाषा की कई पोस्ट डाली गई है। इन पोस्टों से किसी को फायदा होगा या कार्यकर्ताओं की अपनी आवाज है यह सब कहना काफी मुश्किल है लेकिन चौराहों पर हो रही चर्चाओं पर विश्वास करें तो यह सब एक महिला दावेदार के पति द्वारा अपनी पत्नी को टिकट दिलाने के लिये किया जा रहा है। इस प्रकार से बाहरी प्रत्याशी के विरूद्ध माहौल बनेगा तो पार्टी स्थानीय दावेदार को बरियता देगी। इसके बाद उनकी पत्नी को टिकट मिल जायेगा।

बाहरी के विरोध के बाद कट गई थी रजनी दिलेर की टिकट

इससे पहले वर्ष 2012 के चुनाव में भी रजनी दिलेर की टिकट फाइनल होने के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतर कर बाहरी प्रत्याशी होने का हवाला देते हुये प्रदर्शन किया था जिसके बाद भाजपा शीर्ष नेतृत्व को टिकट बदलनी पड़ी । रजनी दिलेर की टिकट काटकर राजेश दिवाकर को टिकट देकर चुनाव लड़ाया गया। इस चुनाव में राजेश दिवाकर को हार का मुंह देखना पड़ा था। राजनैतिक जानकारों का मानना था कि रजनी दिलेर के टिकट कटने से वाल्मीकि समाज नाराज हो गया था इसके बाद समाज का वोट भाजपा को नही मिला।

error: Content is protected !!