पिछले वर्ष की पाठ्य पुस्तको के साथ भी छात्र विद्यालय में अध्ययन कर सकते है , एडीएचआर के विरोध के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक ने की प्रधानाचार्यों के साथ की बैठक

हाथरस। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स द्वारा अविभावकों के आर्थिक शोषण किये जाने के खिलाफ आंदोलन शुरू करने एवँ ज्ञापन देंने के बाद प्रशासन हरकत में आया। आज समस्त प्रधानाचार्यो के साथ एक आवश्यक बैठक कार्यालय जिला विद्यालय निरीक्षक, हाथरस के सभागर कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में आलोक श्रीवास्तव खण्ड शिक्षा अधिकारी जिला मुख्यालय बेसिक शिक्षा विभाग तथा जगदीश शर्मा, जिला समन्वयक सी0बी0एस0ई बोर्ड जनपद हाथरस, प्रधानाचार्य लॉर्ड कष्णा पब्लिक स्कूल मथुरा रोड, द कैम्ब्रेज इण्टरनेशनल स्कूल हाथरस, सेण्ट फ्रान्सिस इण्टर कालेज, बी0एल0एस0 इण्टरनेशनल स्कूल हाथरस, दून पब्लिक स्कूल हाथरस, बाईट कैरियर पब्लिक स्कूल हाथरस, राजेन्द्र लोहिया विद्या मंदिर इण्टर कालेज हाथरस, सीमैक्स इण्टरनेशनल स्कूल सासनी, दिल्ली पब्लिक स्कूल मथुरा रोड,सेन्ट्रल पब्लिक स्कूल सादाबाद, बलवंत सिह सि0सै0 स्कूल सलेमपुर आदि स्कूलों के प्रधानाचार्यो द्वारा प्रतिभाग किया गया। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक, हाथरस द्वारा समस्त प्रधानाचार्यो से विगत 03 वर्ष में शासनादेश में दी गयी व्यवस्थानुसार फीस मेें वृद्धि किये जाने पर जानकारी देते हुये निर्देशित किया गया कि कोई मान्यता प्राप्त विद्यालय, अपने विद्यमान छात्रों के लिए, पूर्ववर्ती वर्ष के अध्यापन कर्मचारी वर्ग के मासिक वेतन में प्रति व्यक्ति वृद्धि के औसत के बराबर विद्यालय के प्रत्येक वर्ग/कक्षा/स्तर के लिए स्वयं अपने वार्षिक शुल्क में पुनरीक्षण कर सकता है, परन्तु शुल्क वृद्धि नवीनतम उपलब्ध वार्षिक प्रकाशित बढी हुई उपभोक्ता मूल्य सूचकॉक $ छात्र से वसूल किये गये पॉच प्रति0 शुल्क से अधिक नही होगी। विद्यालय एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों और विषयों को निर्धारित कर सकता है,जिनमें इन्हे एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित किया गया है। निजी प्रकाशकांे के पुस्तकों के चयन में अत्यधिक सावधानी बरती जानी चाहिए ताकि इसमें ऐसी कोई आपत्तिजनक विषय वस्तु नही हो, जिससे किसी वर्ग, समुदाय, लिंग अथवा समाज में किसी धार्मिक समूह की भावना आहत हो। विद्यालय अपनी वेबसाइट पर प्रबंधक तथा प्रधानाचार्य द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित लिखित घोषणा के साथ निर्धारित पुस्तकों की एक सूची डालेगा कि उन्होने विद्यालय द्वारा निर्धारित पुस्तकों की विषय वस्तुओं की जॉच की है और जिम्मेदारी ली है, कि यदि किसी विद्यालय को आपत्तिजनक विषय वस्तु वाली पुस्तक को निर्धारित करता पाया जाता है, तो एसे विषय वस्तु की जिम्मेदारी उस विद्यालय की होगी और बोर्ड द्वारा उस विद्यालय के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। जिला विद्यालय निरीक्षक महोदय द्वारा बैठक में प्रधानाचार्यो को यह भी निर्देश दिये गये कि समस्त प्रधानाचार्य अपने विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करते हुये अभिावकों को सूचित करेंगें कि पिछले वर्ष की पाठ्यपुस्तको के साथ भी छात्र विद्यालय में अध्ययन कर सकते है या एनसीईआरटी की विभागीय वेबसाइट से ई-बुक डाउनलोड कर के भी छात्र अध्ययन कर सकते है। बैठक में प्रधानाचार्यो को निर्देश दिये गये कि किसी छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे व यूनिफार्म आदि किसी विशिष्ट दुकान से क्रय करने के लिए बाध्य न किया जाये। इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर सम्बन्धित विद्यालय के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
बता दें कि अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स द्वारा 01 अप्रैल को एक ज्ञापन जिलाधिकारी राहुल पांडेय की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट प्रभारी उपजिलाधिकारी मनीष चौधरी को दिया
राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने जिलाधिकारी राहुल पांडेय को बताया कि प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा अविभावकों का जमकर आर्थिक शोषण किया जा रहा है वेहताशा फीस वृद्धि, हर वर्ष पाठ्यक्रम बदलकर आदि अंयत्र साधनों से मनमानी की जा रही है चुनिंदा दुकानों को ठेका देकर अविभावकों को खरीदने को मजबूर किया जाता है
इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने वह अभिभावकों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश,2018 लाया गया उसके वावजूद भी प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा अध्यादेश का खुला उल्लंघन कर रहे है
यह है कि प्रमुख रूप से सेंट फ्रांसिस स्कूल, हाथरस व बीएलएस इंटरनेशनल स्कूल, हाथरस द्वारा जमकर शोषण किया जा रहा है
यह है कि फीस वृद्धि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश,2018 के अनुरूप होनी चाहिये फीस वृद्धि का आधार शिक्षा सत्र 2015-2016 को मानकर ही निर्धारण होना चाहिए इसके अपितु फीस शिक्षा सत्र 2025-2026 मे फीस लगभग दोगुना (30%-50%) किन मापदण्डों के अनुसार हो गई है
यह है कि प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्रम बदलकर अविभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्रम बदलने का क्या कारण है एक वर्ष मे भारत वर्ष में क्या बदलाव आ जाता है जो पाठ्यक्रम बदलना पडता हैं जो अभिभावकों पर आर्थिक बोझ के रूप में पड़ता है स्कूल संचालक प्राइवेट राइटरो से मोटा कमीशन लेकर राइटरों के नाम बदल कर अभिभावकों को हर वर्ष कोर्स खरीदने पर मजबूर किया जाता है छोटे से छोटे बच्चों का कोर्स 3000-4000-10000 ₹ हजार रुपयों का आता है जिसमें देखा जाता है कि बहुत पतली पतली किताब है ढाई -ढाई, तीन-तीन,पांच-पांच सौ रुपए की प्रिंट होकर आती है यह सिर्फ और सिर्फ अभिभावकों को लूटने का कार्य है
*केंद्र की ईकाई एनसीआरटी का सिलेबस क्यों नहीं पढाया जाता है*- भारत सरकार की इकाई एनसीईआरटी की एक बुक भी किसी स्कूल में नहीं लगाई जाती है इससे पता चलता है कि भारत सरकार की इकाई का महत्व इन प्राइवेट स्कूल संचालकों के मन में कुछ भी नहीं है अगर यह लोग एनसीईआरटी पुस्तकों के माध्यम से पढ़ाई करेंगे तो इनका मोटा धंधा बंद हो जाएगा
अंत में मांग की कि पाठ्यक्रम बदलने पर पूर्णतय: रोक लगाकर पुराने पाठ्यक्रम से ही पढाई कराने
एवं एनसीआरटी के पाठ्यक्रम से ही स्कूलों में पढाने के दिशा-निर्देश जारी किए जाये साथ ही साथ फीस उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश,2018 के अनुरूप शिक्षा सत्र 2015-2016 को आधार मानकर ही ली जाये और अध्यादेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ अध्यादेश के अनुरूप कार्यवाही करने की मांग रखी गई थी।

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